नियमित जांच में लापरवाही बढ़ा रही खतरा, जिले की 10 फीसदी गर्भवतियां पहुंचीं हाई रिस्क श्रेणी में
प्रकाशित: 18 जून 2026 को 6:52 am बजे
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HALCHAL INDIA NEWSHALCHAL INDIA NEWSहापुड़। गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय सलाह की अनदेखी महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई जांचों में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि लगभग हर दस में से एक गर्भवती महिला हाई रि
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हापुड़।
गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय सलाह की अनदेखी महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई जांचों में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि लगभग हर दस में से एक गर्भवती महिला हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में पहुंच चुकी है। ऐसे मामलों में प्रसव के दौरान जटिलताओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है, जबकि सिजेरियन ऑपरेशन की स्थिति में मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक करीब 12 हजार गर्भवती महिलाओं की विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों और अस्पतालों में जांच की गई। इनमें से 1170 महिलाओं में ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं पाई गईं, जिनके कारण उनकी गर्भावस्था को हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इन महिलाओं का उपचार और निगरानी न की जाए तो प्रसव के समय गंभीर परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
जांच के दौरान 100 से अधिक महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर सात ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी कम पाया गया, जो अत्यंत गंभीर स्थिति मानी जाती है। गर्भावस्था में खून की कमी मां और शिशु दोनों के लिए जोखिम बढ़ाती है। इसके अलावा कई महिलाओं में मधुमेह, थायराइड, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, किडनी संबंधी समस्याएं तथा बहुभ्रूण गर्भधारण जैसी जटिलताएं भी सामने आई हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार एक अप्रैल से एक जून के बीच ही 171 नई हाई रिस्क गर्भवतियां चिन्हित की गई हैं। इन महिलाओं को विशेष निगरानी में रखा गया है और उनके स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इनके लिए विशेष फॉलोअप व्यवस्था भी बनाई है, ताकि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति को समय रहते संभाला जा सके।
नियमित जांच से टल सकता है बड़ा खतरा
महिला रोग विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में नियमित जांच के माध्यम से जोखिमों की पहचान की जा सकती है। लेकिन कई महिलाएं समय पर अस्पताल नहीं पहुंचतीं या जांच कराने में लापरवाही बरतती हैं, जिससे बाद में स्थिति गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का अर्थ है ऐसी गर्भावस्था जिसमें मां या गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर सामान्य से अधिक खतरा मौजूद हो।
कॉल सेंटर से रखी जा रही निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने हाई रिस्क गर्भवतियों की देखरेख के लिए विशेष कॉल सेंटर भी स्थापित किया है। यहां से महिलाओं से नियमित संपर्क कर उन्हें दवाओं, जांचों और चिकित्सकीय परामर्श के बारे में जानकारी दी जा रही है। साथ ही आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को भी इन महिलाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
हर माह की नौ तारीख को लग रहे विशेष शिविर
जिला स्वास्थ्य प्रशासन गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रत्येक माह की नौ तारीख को सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेष जांच शिविर आयोजित कर रहा है। इन शिविरों में रक्त जांच, वजन, रक्तचाप, शुगर सहित अन्य आवश्यक परीक्षण किए जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गर्भवती महिलाएं समय-समय पर जांच कराती रहें और डॉक्टरों की सलाह का पालन करें तो अधिकांश हाई रिस्क मामलों को नियंत्रित किया जा सकता है तथा सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सकता है।
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